◆ अष्टावक्र का आत्म-ज्ञान कराने का अजीब तरीका- आपने अष्टावक्र के बारे में सुना, अष्टावक्र का मतलब उनके शरीर में 8 तरह की विकलांगताए थी। वो ऐसे पैदा हुए थे; क्योंकि उन्हें अपने पिता ने ही श्राप दिया था। जब वे अपनी माता की कोख में थे। उनके पिता भी एक मशहूर संत थे, और एक महान विद्वान थे। जो कई जीवन कालो में बहुत कुछ प्राप्त कर चुके थे।
जब पत्नी गर्भवती हो तो परंपरा का हिस्सा है, कि गर्भवती स्त्री को सभी ग्रंथ, अच्छी चीजें और ज्ञान सुनना चाहिए, क्योंकि उससे गलत और नकारात्मक चीजें नहीं सुननी चाहिए। उससे अच्छा संगीत, अच्छी चीजें सुनने चाहिए। लोग भगवत गीता और वेद पढ़ते हैं। वो समझे या नहीं समझे, फर्क नहीं पड़ता। बच्चा सुनेगा और धीरे-धीरे सुनकर उसका विकास प्रभावित होगा। तो यही करते हुए, पिता कुछ बोल रहे थे। एक ग्रंथ समझा रहे थे। अचानक उन्होंने एक आवाज सुनी। जो पिता की बात से असहमत थी। बच्चे ने कोख से कहा, नहीं ये सही नहीं है।
पिता इससे इतना चिढ़ गए, कि बेटा पैदा भी नहीं हुआ और अस्वीकार कर रहा है। ये उसे 18 की उम्र के बाद करना चाहिए। ये जन्म से पहले ही बोल रहा है, कि आप गलत है। ये किशोरावस्था में हुआ करता था। वे बहुत गुस्सा हो गए और उसे श्राप दिया, "इसे 8 तरह की विकलांगता हो जाए"।
तो वो पैदा हुए एक लगभग गैर-इंसानी रूप में टेढ़ा-मेढ़ा शरीर, तो उन्हें अष्टव्रक नाम दिया गया, यानी 8 तरह की विकलांगताए।
पिता राजा के दरबार में थे, जनक के दरबार में। एक विद्वान थे, बहुत ही ऊंचे विद्वान। राजा जनक को ज्ञान पाने की गहरी इच्छा थी, वो आत्मज्ञान चाहते थे। तो वो हर तरह के संतो, विद्वानों और वैसे हर इंसान को हर जगह से अपने दरबार में ले आया करते थे, और उन से शिक्षा लेने लगे। कुछ समय में वे खुद एक क्षमता वान योगी बन गए। लेकिन वे अब तक आत्मज्ञानी नहीं हुए थे।
फिर एक दिन अष्टावक्र के पिता, इसे छोटे बच्चे को दरबार ले गए। जब राजा जनक ने अष्टवक्र को देखा। अष्टावक्र ने उनकी आंखों में देखा। राजा आप को देखें, तो आपको नीचे देखना होता है। जो सभी विद्वान और अन्य लोग करते थे, लेकिन इस बच्चे ने उन्हें सीधा बस देखा। तो जनक थोड़ा चौंक गए, इतना विकलांग शरीर। उनका शरीर, इंसानों की तरह नहीं था। लेकिन बच्चे की आंखें ऐसी थी कि वो बस राजा को देखता रहा और बोला यहां जितने विद्वान बैठे हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं। पर इनमें से कोई भी और मेरे पिता भी आपको वो नहीं दे पाएंगे, जिसकी आपको तलाश है।
राजा हक्का-बक्का रह गया। ये 8-9 साल का बच्चा, उसे "ये" बोल रहा है और उनके पिता उन्हें चुप करना चाहते थे। क्योंकि इस बच्चे को शुरू से ही ऐसी बातें करने की आदत थी। फिर अष्टवक्र 12 या 14 की उम्र में परिवार छोड़ कर जंगल चले गए।
एक दिन राजा जनक शिकार खेलने गए, अपने सिपाहियों और लोगों के साथ। शिकार खेलते हुए, वो सबसे अलग हो गए और जंगल में खो गए। फिर उन्हें जंगल में अष्टव्रक बैठे मिले तो घोड़े पर बैठा राजा जनक, उन्हें देखकर बोले "आप यहां हैं"। अष्टावक्र बोले हां... और उन्होंने अपने तरीके से उनसे कहा, कि मैं ही आपको यहां लाया हूं, उन सभी लोगों से दूर। अगर आप बस मुझसे निर्देश लेने को तैयार हो तो मैं आपको वहां पहुंचा दूंगा, जहां आप जाना चाहते हैं।
और वो घोड़े से नीचे उतरना चाहते थे। उन्होंने एक पैर ऊपर उठाया और वो ऊपर थे। एक टांग ऊपर और एक टांग नीचें। अष्टावक्र बोले "रुको, वहीं रुक जाओ"। जब राजा घोड़े से उतरने ही वाले थे, तो वो बोले वहीं रुक जाओ, असुविधा की स्थिति में। घोड़े पर ऐसे एक पैर ऊपर और एक पैर रकाब में, तो वो बोले वहीं रुको। ये पहली घटना थी। ठीक है.. ये 8000 साल पहले हुआ था और जनक को आत्मज्ञान हो गया था। उस असुविधा की स्थिति में वे अचानक आत्मज्ञानी हो गए। वो नीचे उतरे अष्टावक्र के आगे झुके और वही रहना चाहते थे।
कुछ समय बाद अष्टावक्र बोले, आप महल वापिस जाइए। जनक बोले बिल्कुल भी नहीं.. महल मेरे लिए कुछ नहीं है। मैं वापस नहीं जाऊंगा। तो अष्टावक्र बोले प्रश्न यह नहीं है, कि आप राजा होना चाहते हैं या नहीं। इस देश के नागरिकों को आत्मज्ञानी राजा की जरूरत है, तो आपको वापस जाना चाहिए तो उन्होंने जनक को वापस भेज दिया।
जब पत्नी गर्भवती हो तो परंपरा का हिस्सा है, कि गर्भवती स्त्री को सभी ग्रंथ, अच्छी चीजें और ज्ञान सुनना चाहिए, क्योंकि उससे गलत और नकारात्मक चीजें नहीं सुननी चाहिए। उससे अच्छा संगीत, अच्छी चीजें सुनने चाहिए। लोग भगवत गीता और वेद पढ़ते हैं। वो समझे या नहीं समझे, फर्क नहीं पड़ता। बच्चा सुनेगा और धीरे-धीरे सुनकर उसका विकास प्रभावित होगा। तो यही करते हुए, पिता कुछ बोल रहे थे। एक ग्रंथ समझा रहे थे। अचानक उन्होंने एक आवाज सुनी। जो पिता की बात से असहमत थी। बच्चे ने कोख से कहा, नहीं ये सही नहीं है।
पिता इससे इतना चिढ़ गए, कि बेटा पैदा भी नहीं हुआ और अस्वीकार कर रहा है। ये उसे 18 की उम्र के बाद करना चाहिए। ये जन्म से पहले ही बोल रहा है, कि आप गलत है। ये किशोरावस्था में हुआ करता था। वे बहुत गुस्सा हो गए और उसे श्राप दिया, "इसे 8 तरह की विकलांगता हो जाए"।
तो वो पैदा हुए एक लगभग गैर-इंसानी रूप में टेढ़ा-मेढ़ा शरीर, तो उन्हें अष्टव्रक नाम दिया गया, यानी 8 तरह की विकलांगताए।
पिता राजा के दरबार में थे, जनक के दरबार में। एक विद्वान थे, बहुत ही ऊंचे विद्वान। राजा जनक को ज्ञान पाने की गहरी इच्छा थी, वो आत्मज्ञान चाहते थे। तो वो हर तरह के संतो, विद्वानों और वैसे हर इंसान को हर जगह से अपने दरबार में ले आया करते थे, और उन से शिक्षा लेने लगे। कुछ समय में वे खुद एक क्षमता वान योगी बन गए। लेकिन वे अब तक आत्मज्ञानी नहीं हुए थे।
फिर एक दिन अष्टावक्र के पिता, इसे छोटे बच्चे को दरबार ले गए। जब राजा जनक ने अष्टवक्र को देखा। अष्टावक्र ने उनकी आंखों में देखा। राजा आप को देखें, तो आपको नीचे देखना होता है। जो सभी विद्वान और अन्य लोग करते थे, लेकिन इस बच्चे ने उन्हें सीधा बस देखा। तो जनक थोड़ा चौंक गए, इतना विकलांग शरीर। उनका शरीर, इंसानों की तरह नहीं था। लेकिन बच्चे की आंखें ऐसी थी कि वो बस राजा को देखता रहा और बोला यहां जितने विद्वान बैठे हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं। पर इनमें से कोई भी और मेरे पिता भी आपको वो नहीं दे पाएंगे, जिसकी आपको तलाश है।
राजा हक्का-बक्का रह गया। ये 8-9 साल का बच्चा, उसे "ये" बोल रहा है और उनके पिता उन्हें चुप करना चाहते थे। क्योंकि इस बच्चे को शुरू से ही ऐसी बातें करने की आदत थी। फिर अष्टवक्र 12 या 14 की उम्र में परिवार छोड़ कर जंगल चले गए।
एक दिन राजा जनक शिकार खेलने गए, अपने सिपाहियों और लोगों के साथ। शिकार खेलते हुए, वो सबसे अलग हो गए और जंगल में खो गए। फिर उन्हें जंगल में अष्टव्रक बैठे मिले तो घोड़े पर बैठा राजा जनक, उन्हें देखकर बोले "आप यहां हैं"। अष्टावक्र बोले हां... और उन्होंने अपने तरीके से उनसे कहा, कि मैं ही आपको यहां लाया हूं, उन सभी लोगों से दूर। अगर आप बस मुझसे निर्देश लेने को तैयार हो तो मैं आपको वहां पहुंचा दूंगा, जहां आप जाना चाहते हैं।
राजा जनक ने पूछा, क्या आपने मेरे सिपाहियों को देखा। क्या, आपने शाही लोगों को देखा है। क्योंकि वे उन्हें ढूंढ कर घर जाना चाहते थे। अष्टावक्र ने पूछा, आपके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है, वह जो आप जीवन भर ढूंढते रहे हैं या घर वापस जाना है, क्या महत्वपूर्ण है। इसका राजा पर बहुत असर हुआ। वे बोले नहीं, मैं सिर्फ वही चाहता हूं, महल वापसी कि मुझे कोई चिंता नहीं है।
और वो घोड़े से नीचे उतरना चाहते थे। उन्होंने एक पैर ऊपर उठाया और वो ऊपर थे। एक टांग ऊपर और एक टांग नीचें। अष्टावक्र बोले "रुको, वहीं रुक जाओ"। जब राजा घोड़े से उतरने ही वाले थे, तो वो बोले वहीं रुक जाओ, असुविधा की स्थिति में। घोड़े पर ऐसे एक पैर ऊपर और एक पैर रकाब में, तो वो बोले वहीं रुको। ये पहली घटना थी। ठीक है.. ये 8000 साल पहले हुआ था और जनक को आत्मज्ञान हो गया था। उस असुविधा की स्थिति में वे अचानक आत्मज्ञानी हो गए। वो नीचे उतरे अष्टावक्र के आगे झुके और वही रहना चाहते थे।
कुछ समय बाद अष्टावक्र बोले, आप महल वापिस जाइए। जनक बोले बिल्कुल भी नहीं.. महल मेरे लिए कुछ नहीं है। मैं वापस नहीं जाऊंगा। तो अष्टावक्र बोले प्रश्न यह नहीं है, कि आप राजा होना चाहते हैं या नहीं। इस देश के नागरिकों को आत्मज्ञानी राजा की जरूरत है, तो आपको वापस जाना चाहिए तो उन्होंने जनक को वापस भेज दिया।
अष्टावक्र का अपने शिष्य को आत्म ज्ञान देने का अजब तरीका
Reviewed by Tarun Baveja
on
July 21, 2020
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